आपको इस आर्टिकल में मिलेगा बसंत पंचमी की पूजा विधि , शुभ मुहूर्त और ऐतिहासिक महत्व और सांस्कर्तिक प्रोग्राम इत्यादि जानकारी सम्पूर्ण गुणवत्ता पूर्वक |
बसंत पंचमी: सम्पूर्ण जानकारी
बसंत पंचमी भारत वर्ष मे मनाये जाने वाला एक प्रमुख पर्व है, जिसे विद्या, ज्ञान , शिक्षा और सरस्वती पूजा के रूप में मनाया जाता है। यह दिन माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को आता है , इसे और बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक माना जाता है, इस समय पतझड़ का मौसम होता है । इस दिन माँ सरस्वती, जो विद्या, बुद्धि, संगीत, कला और ज्ञान की देवी हैं, की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, माँ विणा धारणी की वंदना के साथ पूजा अर्चना की जाती है , स्कुल , कॉलेज और महा विधालय में प्रोग्राम किये जाते है |
जाने बसंत पंचमी का धार्मिक महत्व
हिन्दू धर्म में बसंत पंचमी का धार्मिक महत्व अत्यधिक है। इसे माँ सरस्वती पूजा के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि इस दिन को माँ सरस्वती का अवतरण दिवस माना जाता है, माँ सरसवती विदा की देवी मणि जाती है | धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने माँ सरस्वती को जन्म दिया था, जो ज्ञान और संगीत की देवी बनीं।
इस दिन विशेष रूप से विद्यार्थी, शिक्षक, कलाकार और संगीतज्ञ माँ सरस्वती की आराधना करते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, वसंत वञ्चमी को खाश बनाने के लिए स्कूलों कॉलेजों में सांस्कर्तिक संगीत प्रोग्राम और , विणा वादन का आयोजन किया जाता है , स्वर की देवी सरसवती की पुष्पों अर्पित कर पूजा सम्पन की जाती है |
बसंत पंचमी का ऐतिहासिक महत्व और इतिहास
प्राचीन साक्ष्यों और तथ्यों के अनुसार बसंत पंचमी का वर्णन रामायण, महाभारत और पुराणों में भी मिलता है। यह दिन राजा साम्राट विक्रमादित्य के समय से एक महत्वपूर्ण पर्व के रूप में मनाया जाता रहा है ,राज दरबारों में सनकार्तिक प्रोग्राम और राज कवियों द्वारा संगीत माय माहौल में राजा – महाराज द्वारा आयोजन किया जाता है ।
इसके अलावा, मुगल काल में भी इस दिन को विशेष रूप से मनाया जाता था। खासतौर पर अकबर और जहांगीर के समय में इसे एक उत्सव की तरह मनाया जाता था, जिसमें आम और खास सभी लोग हिस्सा लेते थे।
बसंत पंचमी का सांस्कृतिक महत्व और प्रोग्राम
भारत के विभिन्न राज्यों और रियासतों में बसंत पंचमी को अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है:
- उत्तर भारत:
- इस दिन पीले वस्त्र पहनने की परंपरा है।
- माँ सरस्वती की पूजा की जाती है।
- बच्चों को पहली बार अक्षर लिखना सिखाने की परंपरा है, जिसे “विद्या आरंभ” या “अक्षरारंभ” कहा जाता है।
- बंगाल:
- यहाँ इस पर्व को सरस्वती पूजा के रूप में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
- विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए यह विशेष महत्व रखता है।
- पंजाब और हरियाणा:
- इस दिन पतंग उड़ाने की परंपरा है।
- लोग खेतों में पीली सरसों की फसल देखकर आनंद मनाते हैं।
- महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश:
- बसंत पंचमी पर घरों में हल्दी-चावल का भोग लगाया जाता है।
- माँ सरस्वती के चित्र और मूर्तियाँ स्थापित कर उनकी पूजा की जाती है।
- राजस्थान:
- यहाँ बसंत पंचमी को पतंग महोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
बसंत पंचमी की पूजा विधि और सुभ मुहूर्त
1. पूजन सामग्री:
माँ सरस्वती की पूजा के समय पूजा सामग्री विधि और मुहूर्त को निचे दर्शाया गया है ,
✅ माँ सरस्वती की मूर्ति या चित्र
✅ पीले फूल और पीला वस्त्र
✅ हल्दी, चंदन, रोली
✅ अक्षत (चावल)
✅ प्रसाद (पीली मिठाइयाँ, खीर, फल)
✅ दीपक और अगरबत्ती
2. पूजन विधि:
माननीय पंडितो के अनुसार माँ सारदे की पूजा विधि को बताया गया है जो निचे निम्न प्रकार है
- प्रातः स्नान करके पीले वस्त्र धारण करें।
- माँ सरस्वती की मूर्ति या चित्र को एक स्वच्छ स्थान पर रखें।
- माँ सरस्वती को पीले वस्त्र अर्पित करें और पुष्प चढ़ाएँ।
- हल्दी, चंदन और अक्षत से तिलक करें।
- माँ सरस्वती की आरती करें और प्रसाद का भोग लगाएँ।
- बच्चों को इस दिन पहली बार लेखन कार्य कराने की परंपरा होती है।
बसंत पंचमी पर विशेष कार्य
बसंत पंचमी के दिन होने वाले विशेष कार्यो की सूचि निचे दी गई है , जो भारत वर्ष में मनाये जाते है , माँ सरस्वती की पूजा आराधना कर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ इस दूँ का समापन किया जाता है |
🔸 पीले वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
🔸 पीले भोजन का सेवन करना और दान करना शुभ होता है।
🔸 इस दिन विद्या आरंभ (बच्चों को पहली बार लिखना सिखाना) करना शुभ होता है।
🔸 पतंग उड़ाना भी इस दिन का एक महत्वपूर्ण भाग होता है।
बसंत पंचमी पर बनने वाले खास व्यंजन
बसंत पंचमी की दिन पुरे भारत में अलग – अलग राज्यों में अलग -अलग प्रकार के व्यंजन तैयार किये जाते है , जो वहां की सांस्कृतिक और कल्चर को दिखाया जाता है |
- केसर हलवा
- पीला मीठा चावल
- बेसन के लड्डू
- खीर
- सरसों का साग और मक्के की रोटी
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बसंत पंचमी और विवाह शुभ मुहूर्त
बसंत पंचमी को भारत में अबूझ मुहूर्त कहा जाता है, यानी इस दिन बिना किसी ज्योतिषीय गणना और पंडित के शुभ कार्य किए जा सकते हैं। इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, नए कार्यों की शुरुआत, यज्ञ आदि करना
निष्कर्ष :
माँ सरस्वती का दिन बसंत पंचमी का दिन एक विशेष दिन है ,आप सभी इस दिन माँ शारदे की पूजा अर्चना और सांस्कृतिक प्रोग्राम का आयोजन किया जाता है , इस दिन छात्र – छात्राये स्कुल और कॉलेज में भिन्न – भिन्न कलाये ओर संगीत प्रोग्राम रचित किया जाता है |
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