होलिका दहन, एक प्रसिद्ध हिन्दू पर्व है, जो खासतौर पर होली के त्योहार से जुड़ा हुआ होता है। यह पर्व भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है और इसे रंगों के त्यौहार होली से पहले मनाया जाता है। होलिका दहन को लोग अपनी बुराईयों को जलाकर अच्छाई की विजय का प्रतीक मानते हैं। इस दिन लोग बुराई पर अच्छाई की जीत और जीवन में सुख-शांति के लिए आहुति देते हैं। आइए जानते हैं 2025 में होलिका दहन की तिथि, शुभ मुहूर्त, और इसके महत्व के बारे में विस्तार से।
होलिका दहन कब है – 2025 में तिथि : Holi 2025 Kab Hai
2025 में होलिका दहन 6 मार्च को मनाया जाएगा। होलिका दहन हमेशा फाल्गुन महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। यह दिन होली से एक दिन पहले आता है। इस दिन को होलिका के रूप में बुराईयों का प्रतीक जलाकर नष्ट किया जाता है। यह दिन हिन्दू धर्म में विशेष महत्व रखता है और एक महत्वपूर्ण परंपरा के रूप में मनाया जाता है।
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त (2025) : Holi 2025 Muhurat

होलिका दहन का समय और मुहूर्त बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसे सही समय पर करना शुभ माना जाता है। 2025 में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त निम्नलिखित है:
- होलिका दहन तिथि: 6 मार्च 2025
- होलिका दहन का मुहूर्त: 06:51 PM से 08:36 PM तक (यह समय कुछ जगहों पर अलग हो सकता है, इसलिए स्थान के अनुसार सही समय देखने की सलाह दी जाती है)
- होलिका दहन की पूर्णिमा तिथि: 06 मार्च को ही होगी।
इस समय के दौरान होलिका दहन करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इस समय में होलिका की पूजा करके बुराईयों से मुक्ति प्राप्त की जाती है और शुभ फल की प्राप्ति होती है।
होलिका दहन का महत्व : Holi Dahan Ka Mahatav
होलिका दहन का पर्व मुख्य रूप से बुराई के नाश और अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व भारत में विशेष रूप से उत्तर भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। इसके पीछे कई धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएँ हैं। आइए जानते हैं इसके महत्व के बारे में:
(a) राक्षसों पर विजय
होलिका दहन की कथा हिन्दू धर्म के प्राचीन ग्रंथों से जुड़ी हुई है। इसका मुख्य काव्य कथानक राजा हिरण्यकश्यप, उसकी बहन होलिका और भगवान विष्णु के अवतार प्रह्लाद से जुड़ा हुआ है। राजा हिरण्यकश्यप ने भगवान विष्णु के खिलाफ बुरे काम करने की योजना बनाई थी, लेकिन भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की। वहीं, होलिका, जो कि अपनी अमरता के कारण अग्नि से न जलने का दावा करती थी, प्रह्लाद को जलाने के लिए अग्नि में बैठी, लेकिन वह खुद जल गई। इससे यह संदेश मिलता है कि बुराई, चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अच्छाई के सामने टिक नहीं सकती।
(b) जीवन में सकारात्मकता का आगमन
होलिका दहन के दिन बुराई को जलाने और अच्छाई को प्रतिष्ठित करने की परंपरा है। इस दिन बुरे विचारों, कर्मों और नकारात्मकता को जीवन से निकालने का संकल्प लिया जाता है। इसे एक तरह से मानसिक शुद्धता और आत्म सुधार का अवसर भी माना जाता है। लोग इस दिन अपने पुराने ग़लतियों और नफरत को जलाकर नये अच्छे विचारों की शुरुआत करते हैं।
(c) खेतों में उपज की खुशहाली के प्रतीक
होलिका दहन कृषि प्रधान क्षेत्रों में भी खास महत्व रखता है। इसे फसल की अच्छी उपज और खेतों में समृद्धि के लिए भी पूजा जाता है। ऐसा माना जाता है कि होलिका दहन से वातावरण शुद्ध होता है और नई फसल के लिए उर्वरक मिलती है। इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में यह त्योहार बहुत धूमधाम से मनाया जाता है।
(d) समाज में एकता और भाईचारे का प्रतीक
होलिका दहन एक सामाजिक उत्सव है जो समाज में एकता, भाईचारे और प्रेम को बढ़ावा देता है। इस दिन लोग अपने रिश्तों को मजबूत करने के लिए एक-दूसरे से मिलते हैं और एक साथ रंगों के त्यौहार की शुरुआत करते हैं। यह दिन एक-दूसरे को क्षमा करने और नफरतों को भूलकर सकारात्मक भावनाओं से भरे रहने का प्रेरक बनता है।
होलिका दहन के रीति-रिवाज और पूजा विधि : Holi Puja Vidhi
होलिका दहन के दिन कुछ विशेष रीति-रिवाजों का पालन किया जाता है, जिनसे इस दिन के महत्व को बढ़ाया जाता है। आइए जानते हैं इस दिन की पूजा विधि के बारे में:
(a) होलिका की सजावट
इस दिन लोग होलिका का एक विशाल ढेर बनाते हैं, जो लकड़ी, घास, और दूसरे ज्वलनशील पदार्थों से भरा होता है। इसके ऊपर होलिका की प्रतीकात्मक आकृति रखी जाती है। कुछ स्थानों पर, लोग होलिका की मूर्ति भी बनाते हैं।
(b) पूजा का आयोजन
शाम के समय जब होलिका दहन का मुहूर्त आता है, तब लोग इस ढेर के चारों ओर परिक्रमा करते हैं और फिर उसमें आग लगा देते हैं। इस दौरान लोग मंत्रोच्चार और पूजा करते हैं, ताकि सभी बुराईयों का नाश हो और जीवन में सुख-शांति आये।
(c) आहुति देना
होलिका दहन के दौरान लोग अपनी बुराईयों, पापों और पुराने कष्टों को जलाने के प्रतीक के रूप में आहुति देते हैं। इसके साथ ही लोग अपनी मनोकामनाएं भी प्रकट करते हैं और जीवन में अच्छे परिणामों की कामना करते हैं।
(d) भक्तिपूर्वक पूजा
होलिका दहन के बाद लोग घरों में भी पूजा करते हैं, और घर की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं। इस दिन घर में दीप जलाना और शुभ कामों की शुरुआत करना भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
होलिका दहन से जुड़े विशेष उपाय : Holi Dahan Visesh Upay
होलिका दहन का दिन उपायों के लिए भी उपयुक्त माना जाता है। इस दिन कुछ विशेष उपाय किए जाते हैं, जो जीवन को सुखमय और समृद्ध बनाने में मदद करते हैं:
- नकली दीपकों को जलाएं: होलिका दहन के बाद घर के सभी कोनों में दीपक जलाने से घर में नकारात्मकता समाप्त होती है।
- पीपल के वृक्ष की पूजा करें: होलिका दहन के बाद पीपल के वृक्ष की पूजा करने से सारे दुख दूर होते हैं और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
- काले तिल और गुड़ का दान करें: इस दिन काले तिल और गुड़ का दान करना भी बहुत शुभ माना जाता है। इससे समृद्धि और खुशहाली की प्राप्ति होती है।
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निष्कर्ष
होलिका दहन न केवल एक धार्मिक परंपरा है, बल्कि यह समाज में सकारात्मकता, प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देने का एक माध्यम है। इस दिन का महत्व अत्यधिक है क्योंकि यह हमें यह सिखाता है कि बुराई के बावजूद अच्छाई की हमेशा विजय होती है। 2025 में होलिका दहन का पर्व 6 मार्च को मनाया जाएगा, और इसके साथ ही यह समय है जब हम अपने जीवन में से सभी नकारात्मकता को जलाकर नये और सकारात्मक विचारों की शुरुआत करें।
यदि आप इस दिन का पूरा लाभ उठाना चाहते हैं तो शुभ मुहूर्त के अनुसार होलिका दहन करें और साथ ही साथ कुछ उपाय भी करें ताकि जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का वास हो।
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