उनके लिए ( Unke Liye ) - तेरा लेख़क मुकेश पारीक ( Mukesh Pareek ) | खुद की कलम पब्लिकेशन
by तेर लेख़क - मुकेश पारीक
'उनके लिए' महज़ एक किताब नहीं, बल्कि उन अनकहे अहसासों का एक पुलिंदा है, जो अक्सर हम कह नहीं पाते। मुकेश पारीक ने अपनी 'ख़ुद की कलम' से उन ख़यालों और जज़्बातों को इन पन्नों पर बिखेरा है, जिन्हें महसूस किया। इस संग्रह की हर ग़ज़ल कभी किसी ख़ामोशी से जन्मी है, तो कभी अनकहे लफ़्ज़ों की गूँज बनकर काग़ज़ पर उतरी है।
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पुस्तक का विवरण
समर्पण
उन तमाम अहसासों और इंसानो के नाम, जिन्होंने मुझे शब्दों में ढलना सिखाया... और 'उनके लिए' जिनके अहसासों ने मेरी कलम को “ख़ुद की कलम” बनाया।
“उनके लिए”
इस संग्रह की हर ग़ज़ल
कभी किसी ख़ामोशी से जन्मी है,
तो कभी अनकहे लफ़्ज़ों की
गूँज बनकर काग़ज़ पर उतरी है।
अगर इन पंक्तियों में आपको अपनी कोई कहानी मिल जाए,
तो समझिए ये ग़ज़लें अपना मक़सद पूरा कर चुकी हैं।
लेख़क की अपनी बात:
ग़ज़ल मेरे लिए
केवल एक काव्य विधा नहीं है,
यह ख्यालों, एहसासों और भावनाओं को
महसूस करने का
एक सच्चा ज़रिया है।
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