Hii
Anonymous
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2 दिन पहले
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घर की ज़ंजीरें
कितना ज़्यादा दिखाई पड़ती हैंजब घर से कोई लड़की भागती है
क्या उस रात की याद आ रही हैजो पुरानी फ़िल्मों में बार-बार आती थी
जब भी कोई लड़की घर से भागती थी?बारिश से घिरे वे पत्थर के लैंप पोस्ट
सिर्फ़ आँखों की बेचैनी दिखाने भर उनकी रोशनी?और वे तमाम गाने रजतपर्दों पर दीवानगी के
आज अपने ही घर में सच निकले!क्या तुम यह सोचते थे कि
वे गाने सिर्फ़ अभिनेता-अभिनेत्रियों के लिएरचे गए थे?
और वह ख़तरनाक अभिनयलैला के ध्वंस का
जो मंच से अटूट उठता हुआदर्शकों की निजी ज़िदगियों में फैल जाता था?
दोतुम तो पढ़कर सुनाओगे नहीं
कभी वह ख़तजिसे भागने से पहले
वह अपनी मेज़ पर रख गईतुम तो छुपाओगे पूरे ज़माने से
उसका संवादचुराओगे उसका शीशा, उसका पारा,