कलम रुकती नहीं...

Anonymous 17 May 2026 👁 126
कभी ख़यालात लिखती है,
कभी हालात लिखती है।।
 
अच्छे को और अच्छा,
बुरे को बेकार लिखती है।।
 
तेरी सोच से कहीं ऊपर,
तेरा किरदार लिखती है।।
 
ख़ुद की क़लम रुकती नहीं,
हर रोज़ बे-हिसाब लिखती है।।