प्रेमचंद की कहानियाँ
प्रेमचंद की कहानियाँ हिंदी कथा-साहित्य की नींव मानी जाती हैं। उन्होंने लगभग तीन सौ कहानियाँ लिखीं, जिनमें किसान की भूख, जाति का अपमान और आम आदमी की छोटी-छोटी जीतें सबसे बड़े विषय हैं। इस पेज पर उनकी 15 सर्वश्रेष्ठ कहानियों का सारांश, मूल भाव और मुख्य पात्र दिए गए हैं।
प्रेमचंद से पहले हिंदी कहानी में तिलिस्म, ऐयारी और राजा-रानी के क़िस्से थे। वे पहले लेखक थे जिन्होंने किसान, चमार, विधवा और मज़दूर को कहानी का नायक बनाया। इसीलिए उन्हें हिंदी कहानी का जनक कहा जाता है।
यह पेज एक पढ़ने की गाइड है, कहानियों का पूरा पाठ नहीं। हर कहानी दो से पाँच हज़ार शब्दों की है, इसलिए यहाँ सारांश और भाव दिया गया है ताकि आप तय कर सकें कि कौन सी कहानी पहले पढ़नी है। नीचे यह भी बताया गया है कि पूरी कहानियाँ कहाँ मुफ़्त पढ़ी जा सकती हैं।
प्रेमचंद की कहानियाँ आज भी क्यों पढ़ी जाती हैं
प्रेमचंद की कहानियाँ आज भी पढ़ी जाती हैं क्योंकि उनका विषय ख़त्म नहीं हुआ। क़र्ज़, जाति, ग़रीबी और छोटी नौकरी में ईमानदारी की क़ीमत - ये सवाल सौ साल बाद भी वैसे ही हैं। उन्होंने इन्हें उपदेश की तरह नहीं, कहानी की तरह कहा।
दूसरी वजह उनके पात्र हैं। हामिद का चिमटा, हल्कू की रात, घीसू-माधव की भूख - ये किरदार पढ़ने के बाद भूलते नहीं। प्रेमचंद पात्र को अच्छा या बुरा नहीं बनाते, परिस्थिति में डालकर छोड़ देते हैं।
तीसरी वजह उनकी भाषा है। उन्होंने वह हिंदी लिखी जो गाँव में बोली जाती थी - उर्दू के शब्दों के साथ, बिना किसी शुद्धता के आग्रह के। यही सादगी उन्हें आज भी पढ़ने लायक़ बनाती है।
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प्रेमचंद का संक्षिप्त परिचय
प्रेमचंद का असली नाम धनपत राय श्रीवास्तव था और उनका जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के पास लमही गाँव में हुआ। उनका निधन 8 अक्टूबर 1936 को वाराणसी में हुआ। शुरुआत में वे उर्दू में "नवाब राय" नाम से लिखते थे, बाद में "प्रेमचंद" नाम से हिंदी में लिखने लगे।
विकिपीडिया के अनुसार 1921 में असहयोग आंदोलन के दौरान सरकारी नौकरी से त्यागपत्र देने के बाद वे पूरी तरह साहित्य सृजन में लग गए। उन्होंने कुछ महीने मर्यादा पत्रिका का संपादन किया और फिर लगभग छह वर्षों तक माधुरी का। 1930 में उन्होंने बनारस से अपनी मासिक पत्रिका हंस का प्रकाशन शुरू किया।
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विवरण |
जानकारी |
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असली नाम |
धनपत राय श्रीवास्तव |
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उपनाम |
प्रेमचंद, नवाब राय (उर्दू में) |
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जन्म |
31 जुलाई 1880, लमही (वाराणसी) |
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निधन |
8 अक्टूबर 1936, वाराणसी |
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उपाधि |
उपन्यास सम्राट (शरतचंद्र द्वारा दी गई) |
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भाषा |
हिंदी और उर्दू दोनों |
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कहानियाँ |
लगभग 300 |
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उपन्यास |
लगभग 15 |
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कहानी-संग्रह |
मानसरोवर (आठ भागों में) |
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पत्रिकाएँ |
हंस, जागरण, माधुरी, मर्यादा (संपादन) |
उनकी प्रारंभिक शिक्षा उर्दू और फ़ारसी में हुई। 1898 में मैट्रिक पास करने के बाद वे एक स्थानीय विद्यालय में अध्यापक नियुक्त हुए। नौकरी करते हुए उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और 1910 में इंटरमीडिएट तथा 1919 में बी.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की।
हिंदी साहित्य के और बड़े नाम पढ़ने हों तो हमारा लेखक संग्रह देखिए।
किसान और गाँव की कहानियाँ
इन कहानियों में प्रेमचंद किसान की उस विवशता को दिखाते हैं जो मेहनत के बावजूद ख़त्म नहीं होती। यहाँ कोई खलनायक नहीं है, व्यवस्था ही खलनायक है। ये चार कहानियाँ उनके यथार्थवाद का सबसे मज़बूत हिस्सा हैं।
1. पूस की रात
मुख्य पात्र: हल्कू (किसान), मुन्नी (पत्नी), जबरा (कुत्ता)
सारांश: हल्कू एक ग़रीब किसान है जिसने कंबल ख़रीदने के लिए तीन रुपये जोड़े थे, पर वह पैसा महाजन के क़र्ज़ में चला जाता है। पूस की कड़कती रात में वह बिना कंबल के खेत की रखवाली करने जाता है। ठंड से बचने के लिए वह पत्तियाँ जलाता है और अपने कुत्ते जबरा से लिपटकर सोता है। सुबह देखता है कि नीलगायों ने पूरी फ़सल चर ली है - और उसे दुख नहीं होता, राहत होती है कि अब रात-रात भर जागना नहीं पड़ेगा।
मूल भाव: रेख़्ता के अनुसार यह किसानी जीवन की दुर्बलता और सबलता की यथार्थता बयान करती कहानी है। एक किसान जो दिन-रात कड़ी मेहनत करता है और पाई-पाई बचाता है, फिर भी सर्दी से बचने के लिए एक कंबल तक हासिल नहीं कर पाता। अंतिम पंक्ति ही इस कहानी को महान बनाती है - जब आदमी अपनी हार में राहत ढूँढने लगे, तो समझिए व्यवस्था ने उसे तोड़ दिया है।
2. दो बैलों की कथा
मुख्य पात्र: हीरा और मोती (बैल), झूरी (मालिक), गया (झूरी का साला)
सारांश: हीरा और मोती दो बैल हैं जिनकी दोस्ती गहरी है। झूरी उन्हें अपने साले गया के घर भेज देता है, जहाँ उनके साथ बुरा बर्ताव होता है। वे भाग निकलते हैं, रास्ते में एक साँड़ से लड़ते हैं, एक लड़की की मदद करते हैं, काँजीहौस में क़ैद होते हैं और अंत में अपने मालिक के पास लौट आते हैं।
मूल भाव: यह ऊपर से बैलों की कहानी है, पर भीतर से स्वतंत्रता और आत्मसम्मान की। बैल यहाँ भारतीय किसान का प्रतीक हैं - सहनशील, पर सीमा पार होने पर विद्रोह करने वाले। NCERT कक्षा 9 में यह पहला ही पाठ है।
3. सद्गति
मुख्य पात्र: दुखी (चमार), पंडित घासीराम
सारांश: दुखी नाम का एक चमार अपनी बेटी की सगाई का मुहूर्त निकलवाने पंडित घासीराम के पास जाता है। पंडित उससे मुफ़्त में मज़दूरी कराते हैं - घास छीलना, भूसा ढोना और आख़िर में एक विशाल लकड़ी का कुंदा फाड़ना। भूखा और थका दुखी उसी काम में मर जाता है। जाति के कारण कोई उसकी लाश उठाने नहीं आता।
मूल भाव: यह जाति व्यवस्था पर प्रेमचंद का सबसे तीखा प्रहार है। "सद्गति" का अर्थ है मोक्ष, और शीर्षक ही सबसे बड़ा व्यंग्य है। सत्यजित राय ने 1981 में इस पर फ़िल्म भी बनाई थी।
4. कफ़न
मुख्य पात्र: घीसू और माधव (पिता-पुत्र), बुधिया (माधव की पत्नी)
सारांश: घीसू और माधव दो निकम्मे चमार हैं जो काम करने से बचते हैं। माधव की पत्नी बुधिया प्रसव-पीड़ा में तड़प रही है और दोनों बाहर बैठे आलू भून रहे हैं। बुधिया मर जाती है। गाँव वालों से कफ़न के लिए पैसे माँगकर दोनों बाज़ार जाते हैं, पर कफ़न ख़रीदने के बजाय वह पैसा शराब और पूड़ियों पर ख़र्च कर देते हैं।
मूल भाव: यह प्रेमचंद की आख़िरी और सबसे विवादित कहानी है, जो 1936 में लिखी गई। इसे पढ़ते समय ग़ुस्सा घीसू-माधव पर आता है, पर प्रेमचंद का निशाना वह व्यवस्था है जिसने इंसान को इस हद तक निर्लज्ज बना दिया। यह उनकी सबसे निर्मम और सबसे चर्चित रचना है।
जाति, समाज और स्त्री की कहानियाँ
इन कहानियों में प्रेमचंद उन दीवारों पर बात करते हैं जो समाज ने ख़ुद खड़ी की हैं। यहाँ उपदेश नहीं है, सिर्फ़ स्थिति दिखाई गई है। पाठक ख़ुद तय करता है कि ग़लत क्या है।
5. ठाकुर का कुआँ
मुख्य पात्र: गंगी, जोखू (उसका पति)
सारांश: जोखू बीमार है और उसे पीने के लिए साफ़ पानी चाहिए, पर घर के मटके का पानी बदबूदार है। गंगी रात के अँधेरे में ठाकुर के कुएँ से पानी भरने जाती है, क्योंकि उनकी जाति को कुएँ से पानी लेने की इजाज़त नहीं। जैसे ही वह बाल्टी खींचती है, ठाकुर का दरवाज़ा खुलता है और वह डरकर भाग जाती है। घर आकर देखती है कि जोखू वही गंदा पानी पी रहा है।
मूल भाव: पानी जैसी बुनियादी चीज़ भी जाति से तय होती है - यह प्रेमचंद ने बिना एक भी भाषण दिए दिखा दिया। अंतिम दृश्य में गंगी की हार पाठक के भीतर तक उतरती है। यह उनकी सबसे छोटी पर सबसे असरदार कहानियों में है।
6. बूढ़ी काकी
मुख्य पात्र: बूढ़ी काकी, बुद्धिराम (भतीजा), रूपा (उसकी पत्नी), लाडली (छोटी बच्ची)
सारांश: बूढ़ी काकी अपनी सारी संपत्ति भतीजे बुद्धिराम के नाम कर चुकी हैं और अब उनके घर में उपेक्षित पड़ी हैं। घर में तिलक का भोज है, पर काकी को भूखा छोड़ दिया जाता है। भूख से बेचैन होकर वे जूठी पत्तलों पर टूट पड़ती हैं। छोटी लाडली अपने हिस्से की पूड़ियाँ चुपके से उन्हें दे आती है। यह देखकर रूपा को अपनी ग़लती का एहसास होता है।
मूल भाव: बुढ़ापे की उपेक्षा पर हिंदी की सबसे मार्मिक कहानी। सबसे बड़ी बात यह है कि करुणा एक बच्ची से आती है, बड़ों से नहीं। जूठी पत्तल वाला दृश्य पढ़ने के बाद भूलता नहीं।
7. निर्मला-प्रसंग वाली कहानियाँ और स्त्री-जीवन
मुख्य विषय: दहेज, अनमेल विवाह, विधवा जीवन
सारांश: प्रेमचंद ने स्त्री-जीवन पर कई कहानियाँ लिखीं, जिनमें दहेज के कारण बेमेल विवाह, विधवा की स्थिति और स्त्री की आर्थिक विवशता मुख्य विषय हैं। इसी विषय पर उनका उपन्यास निर्मला सबसे प्रसिद्ध है, जो 1926-27 में महादेवी वर्मा द्वारा संपादित पत्रिका चाँद में धारावाहिक रूप में छपा था।
मूल भाव: प्रेमचंद स्त्री को दया की पात्र नहीं, व्यवस्था की शिकार दिखाते हैं। उनका ज़ोर सुधार पर है, आदर्शीकरण पर नहीं।
बचपन और रिश्तों की कहानियाँ
ये प्रेमचंद की सबसे कोमल कहानियाँ हैं और सबसे ज़्यादा पढ़ी जाने वाली भी। यहाँ बड़ी बातें छोटे बच्चों के ज़रिए कही गई हैं। इन्हीं में उनकी सबसे प्रसिद्ध कहानी ईदगाह है।
8. ईदगाह
मुख्य पात्र: हामिद (चार-पाँच साल का बच्चा), अमीना (दादी)
सारांश: ईद के दिन गाँव के बच्चे मेले जाते हैं। अनाथ हामिद के पास सिर्फ़ तीन पैसे हैं। बाक़ी बच्चे खिलौने, मिठाई और झूले पर पैसे ख़र्च करते हैं, पर हामिद उन तीन पैसों से एक चिमटा ख़रीदता है - क्योंकि रोटी सेंकते समय दादी अमीना की उँगलियाँ जल जाती हैं। घर लौटने पर अमीना पहले डाँटती हैं, फिर रो पड़ती हैं।
मूल भाव: कहानी की शुरुआत ही ईद की सुबह के सुंदर वर्णन से होती है - रमज़ान के तीस रोज़ों के बाद आई ईद, पेड़ों पर अजीब हरियाली और आसमान पर अजीब लालिमा। पूरी कहानी का भार अंतिम दृश्य पर है, जहाँ बच्चा बूढ़ा हो जाता है और बुढ़िया बच्चा। यह हिंदी की सबसे प्रसिद्ध कहानी मानी जाती है।
9. बड़े भाई साहब
मुख्य पात्र: बड़े भाई साहब, छोटा भाई (कथावाचक)
सारांश: बड़े भाई साहब छोटे भाई से पाँच साल बड़े हैं और हमेशा उसे पढ़ाई पर उपदेश देते रहते हैं। ख़ुद वे बार-बार फ़ेल होते हैं, जबकि छोटा भाई खेलकूद में समय बिताकर भी पास हो जाता है। एक दिन छोटा भाई कनकौआ लूटने दौड़ता है, तभी बड़े भाई उसे पकड़ लेते हैं - और तभी उनका कनकौआ भी लूटने का मन कर जाता है।
मूल भाव: यह शिक्षा-पद्धति पर व्यंग्य है, पर उससे बड़ी बात भाई-भाई का रिश्ता है। अंतिम दृश्य में बड़े भाई का अपना बचपन बाहर आ जाता है। NCERT कक्षा 10 में यह पाठ है।
10. गुल्ली डंडा
मुख्य पात्र: गया (कथावाचक का बचपन का साथी), कथावाचक (अब अफ़सर)
सारांश: कथावाचक बचपन में गया के साथ गुल्ली डंडा खेलता था, जहाँ गया हमेशा जीतता था। बीस साल बाद वह अफ़सर बनकर उसी गाँव लौटता है और गया अब एक ग़रीब चमार है। वे फिर खेलते हैं, पर इस बार गया जानबूझकर हार जाता है। कथावाचक समझ जाता है कि अब वे बराबर के खिलाड़ी नहीं रहे।
मूल भाव: बचपन में सब बराबर होते हैं, बड़े होकर पद और जाति बीच में आ जाते हैं। जानबूझकर हारने वाला दृश्य पूरी कहानी को पलट देता है।
11. कज़ाकी
मुख्य पात्र: कज़ाकी (डाकिया), लेखक का बचपन वाला रूप
सारांश: कज़ाकी एक डाकिया है जो रोज़ डाक लेकर आता है और बच्चे से उसकी गहरी दोस्ती है। एक दिन रास्ते में उसे एक हिरन का बच्चा मिलता है, जिसे बचाने में उसे डाक पहुँचाने में देर हो जाती है। इसी वजह से उसकी नौकरी चली जाती है।
मूल भाव: दया की क़ीमत नौकरी से ज़्यादा हो सकती है - यह बात बच्चे की नज़र से कही गई है, इसलिए और गहरी लगती है।
व्यंग्य और नीति की कहानियाँ
इन कहानियों में प्रेमचंद का व्यंग्य सबसे तीखा है। निशाना नौकरशाही, सामंतवाद और न्याय-व्यवस्था पर है। ये चार कहानियाँ उनके सबसे चतुर लेखन का नमूना हैं।
12. पंच परमेश्वर
मुख्य पात्र: जुम्मन शेख़, अलगू चौधरी, ख़ाला (जुम्मन की बूढ़ी मौसी)
सारांश: जुम्मन शेख़ और अलगू चौधरी में गाढ़ी मित्रता थी, साझे में खेती होती थी और एक को दूसरे पर अटल विश्वास था। जुम्मन अपनी बूढ़ी ख़ाला की संपत्ति लेकर उन्हें सताने लगता है। ख़ाला पंचायत बुलाती हैं और सरपंच बनते हैं जुम्मन के अपने मित्र अलगू। अलगू फ़ैसला ख़ाला के हक़ में देते हैं। इससे दोस्ती टूट जाती है। बाद में अलगू का मामला पंचायत में आता है और सरपंच बनते हैं जुम्मन - जो न्याय अलगू के पक्ष में देते हैं।
मूल भाव: पंच की कुर्सी पर बैठते ही आदमी बदल जाता है - "पंच में परमेश्वर बसते हैं"। यह कहानी न्याय और मित्रता के टकराव पर हिंदी की सबसे प्रसिद्ध रचना है।
13. नमक का दरोग़ा
मुख्य पात्र: वंशीधर (दरोग़ा), पंडित अलोपीदीन, वंशीधर के पिता
सारांश: वंशीधर नमक विभाग में दरोग़ा बनते हैं। एक रात वे पंडित अलोपीदीन को नमक की तस्करी करते पकड़ लेते हैं। अलोपीदीन रिश्वत देना चाहते हैं, पर वंशीधर नहीं मानते। अदालत में अलोपीदीन बरी हो जाते हैं और वंशीधर की नौकरी चली जाती है। अंत में अलोपीदीन ख़ुद उनके घर आकर उन्हें अपनी सारी जायदाद का मैनेजर बना लेते हैं।
मूल भाव: ईमानदारी की क़ीमत नौकरी हो सकती है, पर सम्मान वही कमाता है। अंतिम मोड़ इस कहानी को साधारण नैतिक कथा से ऊपर उठा देता है। NCERT कक्षा 11 में यह पहला पाठ है।
14. शतरंज के खिलाड़ी
मुख्य पात्र: मिर्ज़ा सज्जाद अली, मीर रौशन अली, नवाब वाजिद अली शाह (पृष्ठभूमि में)
सारांश: वाजिद अली शाह का समय था और लखनऊ विलासिता के रंग में डूबा हुआ था। छोटे-बड़े, अमीर-ग़रीब सभी विलासिता में डूबे थे। मिर्ज़ा और मीर दिन-रात शतरंज खेलते रहते हैं। उधर अंग्रेज़ अवध पर क़ब्ज़ा कर लेते हैं और नवाब को बंदी बना लिया जाता है। इन दोनों को इसकी ख़बर तक नहीं। अंत में वे शतरंज की एक चाल पर आपस में लड़कर एक-दूसरे को मार डालते हैं।
मूल भाव: जब देश जा रहा हो और लोग खेल में डूबे हों, तो पतन तय है। सत्यजित राय ने 1977 में इस पर फ़िल्म बनाई, जो भारतीय सिनेमा की क्लासिक मानी जाती है।
15. मंत्र
मुख्य पात्र: भगत (बूढ़ा साँप-मंत्र जानने वाला), डॉक्टर चड्ढा
सारांश: संध्या का समय था और डॉक्टर चड्ढा गोल्फ़ खेलने की तैयारी में थे, तभी दो कहार एक डोली लेकर आए और पीछे एक बूढ़ा लाठी टेकता चला आ रहा था। बूढ़ा भगत अपने मरणासन्न बेटे को लेकर आया है, पर डॉक्टर चड्ढा गोल्फ़ के समय में इलाज करने से मना कर देते हैं और बेटा मर जाता है। सालों बाद डॉक्टर चड्ढा के अपने बेटे को साँप काट लेता है। वही बूढ़ा भगत आता है और मंत्र से उसकी जान बचा देता है - और बिना कुछ लिए चला जाता है।
मूल भाव: बदले का मौक़ा मिलने पर भी क्षमा चुनना - यह प्रेमचंद के सबसे ऊँचे नैतिक क्षणों में है। भगत का चुपचाप चले जाना ही कहानी का असली अंत है।
प्रेमचंद की कौन सी कहानी पहले पढ़ें
अगर आप प्रेमचंद को पहली बार पढ़ रहे हैं, तो कफ़न से शुरू मत कीजिए। वह उनकी सबसे कठोर कहानी है और शुरुआत में निराश कर सकती है। नीचे पढ़ने का सुझाया गया क्रम दिया गया है।
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क्रम |
कहानी |
क्यों |
अनुमानित समय |
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1 |
ईदगाह |
सबसे सुलभ, भावनात्मक और छोटी |
15 मिनट |
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2 |
बड़े भाई साहब |
हल्का व्यंग्य, पढ़ने में मज़ेदार |
15 मिनट |
|
3 |
पंच परमेश्वर |
कहानी-कला का सबसे संतुलित नमूना |
20 मिनट |
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4 |
नमक का दरोग़ा |
मोड़ वाली कहानी, अंत चौंकाता है |
20 मिनट |
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5 |
पूस की रात |
यहाँ से यथार्थवाद शुरू होता है |
15 मिनट |
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6 |
ठाकुर का कुआँ |
छोटी पर सबसे गहरी चोट |
10 मिनट |
|
7 |
बूढ़ी काकी |
मार्मिकता का शिखर |
20 मिनट |
|
8 |
शतरंज के खिलाड़ी |
ऐतिहासिक व्यंग्य, थोड़ी लंबी |
25 मिनट |
|
9 |
सद्गति |
कठोर, पर ज़रूरी |
20 मिनट |
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10 |
कफ़न |
अंत में पढ़िए, तभी पूरा असर होगा |
20 मिनट |
पहली पाँच कहानियाँ पढ़ने में लगभग डेढ़ घंटा लगेगा, और उसके बाद प्रेमचंद की दुनिया आपके लिए खुल जाएगी।
प्रेमचंद की कहानियाँ मुफ़्त कहाँ पढ़ें
प्रेमचंद की सभी रचनाएँ सार्वजनिक डोमेन में हैं, इसलिए कई जगह मुफ़्त उपलब्ध हैं। नीचे भरोसेमंद स्रोत दिए गए हैं जहाँ पूरा पाठ पढ़ा जा सकता है।
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स्रोत |
क्या मिलेगा |
नोट |
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हिंदी विकिस्रोत |
प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ (1950 संस्करण) |
पाठ प्रामाणिक, स्कैन से लिया गया |
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गद्य कोश |
कहानियाँ, उपन्यास, बाल-साहित्य |
अव्यावसायिक परियोजना |
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हिंदवी |
चुनी हुई कहानियाँ |
कुछ पन्नों के बाद पंजीकरण माँगता है |
|
रेख़्ता |
कहानियाँ, उर्दू संस्करण भी |
उर्दू पाठ भी उपलब्ध |
अगर आप छपी हुई किताब पढ़ना चाहते हैं तो मानसरोवर के आठों भाग सबसे अच्छा विकल्प हैं। हमारे हिंदी बुक स्टोर पर प्रेमचंद की किताबें उपलब्ध हैं, और गोदान तथा निर्मला के अलग पेज भी हैं।
मानसरोवर - प्रेमचंद का कहानी-संग्रह
मानसरोवर प्रेमचंद की कहानियों का सबसे बड़ा संग्रह है, जो आठ भागों में प्रकाशित हुआ। इसमें उनकी लगभग सभी महत्वपूर्ण कहानियाँ शामिल हैं। यह संग्रह उनके निधन के बाद व्यवस्थित रूप में छपा।
इसके अलावा उनके कई अलग कहानी-संग्रह भी हैं:
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संग्रह |
विशेषता |
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सोज़े वतन (1908) |
पहला संग्रह, उर्दू में, अंग्रेज़ों ने ज़ब्त किया |
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प्रेम पचीसी |
शुरुआती हिंदी कहानियाँ |
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नमक का दरोग़ा |
प्रसिद्ध कहानी-संग्रह |
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प्रेम तीर्थ, पाँच फूल, सप्त सुमन |
विषय-आधारित संकलन |
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समरयात्रा |
प्रेमचंद की 11 राजनीतिक कहानियों का संकलन |
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मानसरोवर (आठ भाग) |
सबसे बड़ा और सबसे प्रामाणिक संग्रह |
सोज़े वतन की कहानी सबसे दिलचस्प है। यह 1908 में उर्दू में छपा उनका पहला कहानी-संग्रह था, जिसमें देशभक्ति की कहानियाँ थीं। अंग्रेज़ी सरकार ने इसे राजद्रोहात्मक मानकर ज़ब्त कर लिया और प्रतियाँ जलवा दीं। इसी के बाद उन्होंने "नवाब राय" नाम छोड़कर "प्रेमचंद" नाम अपनाया।
प्रेमचंद के उपन्यास
कहानियों के अलावा प्रेमचंद ने लगभग पंद्रह उपन्यास लिखे। इनमें गोदान को हिंदी का सर्वश्रेष्ठ उपन्यास माना जाता है। शरतचंद्र ने उन्हें "उपन्यास सम्राट" की उपाधि इन्हीं रचनाओं के आधार पर दी थी।
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उपन्यास |
वर्ष |
विषय |
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सेवासदन |
1918 |
वेश्या समस्या और स्त्री जीवन |
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प्रेमाश्रम |
1922 |
बेदख़ली की समस्या पर आधारित |
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रंगभूमि |
1925 |
इसके लिए मंगलाप्रसाद पारितोषिक मिला |
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निर्मला |
1926-27 |
दहेज और अनमेल विवाह |
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गबन |
1931 |
मध्यवर्गीय लालच और पतन |
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कर्मभूमि |
1932 |
स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक चेतना |
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गोदान |
1936 |
किसान जीवन की त्रासदी, अंतिम पूर्ण उपन्यास |
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मंगलसूत्र |
अपूर्ण |
निधन के कारण अधूरा रह गया |
NCERT में प्रेमचंद की कौन सी कहानियाँ हैं
प्रेमचंद की कहानियाँ NCERT की कई कक्षाओं में हैं और हर कक्षा में अलग कहानी है। छात्र अक्सर इन्हें आपस में मिला देते हैं। नीचे मुख्य पाठों की सूची दी गई है।
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कक्षा |
पुस्तक |
कहानी |
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कक्षा 9 |
क्षितिज भाग 1, अध्याय 1 |
दो बैलों की कथा |
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कक्षा 10 |
स्पर्श भाग 2 |
बड़े भाई साहब |
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कक्षा 11 |
आरोह भाग 1, अध्याय 1 |
नमक का दरोग़ा |
इसके अलावा ईदगाह, पंच परमेश्वर और पूस की रात राज्य बोर्डों की पुस्तकों में अलग-अलग कक्षाओं में आती हैं। अपनी पाठ्यपुस्तक ज़रूर जाँच लीजिए, क्योंकि बोर्ड के हिसाब से पाठ बदलते हैं।
परीक्षा में प्रेमचंद की कहानियों पर क्या पूछा जाता है
प्रेमचंद पर सबसे ज़्यादा प्रश्न पात्र-चित्रण और कहानी के उद्देश्य पर आते हैं। सारांश लिखने में अंक कम मिलते हैं, इसलिए भाव और संदेश पर ज़ोर दीजिए।
उत्तर लिखने का सही तरीक़ा:
• पात्र-चित्रण: पात्र के तीन-चार गुण बताइए और हर गुण के साथ कहानी से एक उदाहरण दीजिए। सिर्फ़ गुण गिनाने से अंक नहीं मिलते।
• कहानी का उद्देश्य: प्रेमचंद हमेशा किसी सामाजिक समस्या पर लिखते हैं। उसे पहचानकर एक पंक्ति में लिखिए।
• शीर्षक की सार्थकता: यह प्रश्न बार-बार आता है। "सद्गति" और "कफ़न" जैसे शीर्षक ख़ुद व्यंग्य हैं, यह ज़रूर लिखिए।
• भाषा-शैली: प्रेमचंद की भाषा सरल, बोलचाल वाली और उर्दू मिश्रित है। मुहावरों का प्रयोग उनकी ख़ासियत है।
वे ग़लतियाँ जो नंबर काटती हैं:
• प्रेमचंद को कवि लिख देना: वे गद्यकार थे - कहानीकार और उपन्यासकार। उन्होंने कविता नहीं लिखी।
• असली नाम भूल जाना: धनपत राय श्रीवास्तव। उर्दू में उनका उपनाम नवाब राय था।
• "कफ़न" को आदर्शवादी कहानी बताना: यह उनकी सबसे यथार्थवादी कहानी है। उनका लेखन आदर्शोन्मुख यथार्थवाद से शुद्ध यथार्थवाद की ओर बढ़ा, और कफ़न उसी अंतिम चरण की रचना है।
• कहानियों के पात्र मिला देना: हामिद ईदगाह का है, हल्कू पूस की रात का, घीसू-माधव कफ़न के और गंगी ठाकुर का कुआँ की।
• उपाधि ग़लत लिखना: "उपन्यास सम्राट" उपाधि शरतचंद्र ने दी थी।
हिंदी कहानियों की और किताबें चुननी हों तो हिंदी कहानियों की 15 बेहतरीन पुस्तकें वाली सूची देखिए।
प्रेमचंद की रचनाओं की कॉपीराइट स्थिति
प्रेमचंद की सभी रचनाएँ सार्वजनिक डोमेन में हैं। भारतीय कॉपीराइट क़ानून के अनुसार लेखक की मृत्यु के साठ वर्ष बाद रचनाएँ सार्वजनिक डोमेन में आ जाती हैं। उनका निधन 1936 में हुआ, इसलिए 1997 से उनकी रचनाएँ मुक्त हैं।
इसका मतलब है कि कोई भी उनकी कहानियाँ पढ़, उद्धृत, प्रकाशित और अनुवादित कर सकता है। यही कारण है कि विकिस्रोत और गद्य कोश जैसी साइटों पर पूरा पाठ मुफ़्त उपलब्ध है।
एक बात ध्यान रखिए: किसी आधुनिक विद्वान की लिखी भूमिका, टीका, संपादकीय टिप्पणी या किसी नए संस्करण का विशेष संपादन उस लेखक की अपनी कृति होती है और उस पर अलग कॉपीराइट लागू हो सकता है। मूल कहानी का पाठ मुक्त है, किसी की व्याख्या नहीं।
मुख्य बातें (Key Takeaways)
• प्रेमचंद का असली नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। जन्म 31 जुलाई 1880 को लमही (वाराणसी) में और निधन 8 अक्टूबर 1936 को हुआ।
• उन्होंने लगभग 300 कहानियाँ और 15 उपन्यास लिखे। उनका सबसे बड़ा कहानी-संग्रह मानसरोवर है, जो आठ भागों में है।
• उनका पहला संग्रह सोज़े वतन (1908) उर्दू में था, जिसे अंग्रेज़ी सरकार ने ज़ब्त कर लिया। इसके बाद उन्होंने नवाब राय के बजाय प्रेमचंद नाम अपनाया।
• कफ़न उनकी अंतिम और सबसे कठोर कहानी है, जबकि ईदगाह सबसे लोकप्रिय और सबसे सुलभ।
• शरतचंद्र ने उन्हें "उपन्यास सम्राट" की उपाधि दी थी। गोदान (1936) उनका अंतिम पूर्ण उपन्यास है।
• NCERT में उनकी तीन कहानियाँ मुख्य रूप से हैं - कक्षा 9 में दो बैलों की कथा, कक्षा 10 में बड़े भाई साहब और कक्षा 11 में नमक का दरोग़ा।
• उनकी सभी रचनाएँ 1997 से सार्वजनिक डोमेन में हैं, इसलिए मुफ़्त पढ़ी और प्रकाशित की जा सकती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. प्रेमचंद की सबसे प्रसिद्ध कहानी कौन सी है?
ईदगाह प्रेमचंद की सबसे प्रसिद्ध और सबसे ज़्यादा पढ़ी जाने वाली कहानी है, जिसमें अनाथ बालक हामिद मेले से अपनी दादी के लिए चिमटा ख़रीदता है। साहित्यिक दृष्टि से कफ़न को उनकी सबसे महत्वपूर्ण रचना माना जाता है, जो उनकी अंतिम कहानी भी थी।
Q2. प्रेमचंद ने कुल कितनी कहानियाँ लिखीं?
प्रेमचंद ने लगभग तीन सौ कहानियाँ लिखीं। इनमें से अधिकांश उनके संग्रह मानसरोवर के आठ भागों में संकलित हैं। इसके अलावा उन्होंने लगभग पंद्रह उपन्यास, कई नाटक, निबंध और बाल-साहित्य भी लिखा।
Q3. प्रेमचंद का असली नाम क्या था?
प्रेमचंद का असली नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। शुरुआत में वे उर्दू में "नवाब राय" उपनाम से लिखते थे। 1908 में उनका संग्रह सोज़े वतन ज़ब्त होने के बाद उन्होंने "प्रेमचंद" नाम अपनाया।
Q4. कफ़न कहानी का मूल भाव क्या है?
कफ़न में घीसू और माधव बुधिया के कफ़न के लिए मिले पैसे शराब और पूड़ियों पर ख़र्च कर देते हैं। कहानी का निशाना ये दोनों पात्र नहीं, बल्कि वह व्यवस्था है जिसने इंसान को इस हद तक संवेदनहीन बना दिया। यह प्रेमचंद की अंतिम और सबसे यथार्थवादी रचना है।
Q5. सोज़े वतन क्यों ज़ब्त हुआ था?
सोज़े वतन 1908 में उर्दू में प्रकाशित प्रेमचंद का पहला कहानी-संग्रह था, जिसमें देशभक्ति की कहानियाँ थीं। अंग्रेज़ी सरकार ने इसे राजद्रोहात्मक मानकर ज़ब्त कर लिया और प्रतियाँ जलवा दीं। इसके बाद उन्होंने अपना उपनाम बदलकर प्रेमचंद रख लिया।
Q6. प्रेमचंद को उपन्यास सम्राट किसने कहा था?
प्रेमचंद को "उपन्यास सम्राट" की उपाधि बांग्ला के प्रसिद्ध लेखक शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने दी थी। यह उपाधि उनके सेवासदन, रंगभूमि, गबन, कर्मभूमि और गोदान जैसे उपन्यासों के आधार पर दी गई।
Q7. NCERT में प्रेमचंद की कौन सी कहानियाँ हैं?
NCERT में मुख्य रूप से तीन कहानियाँ हैं - कक्षा 9 की क्षितिज भाग 1 में "दो बैलों की कथा", कक्षा 10 की स्पर्श भाग 2 में "बड़े भाई साहब" और कक्षा 11 की आरोह भाग 1 में "नमक का दरोग़ा"। राज्य बोर्डों में ईदगाह और पंच परमेश्वर भी आती हैं।
Q8. प्रेमचंद की कहानियों की मुख्य विशेषता क्या है?
उनकी कहानियों की सबसे बड़ी विशेषता यथार्थवाद है। उन्होंने पहली बार किसान, मज़दूर, दलित और विधवा को कहानी का नायक बनाया। उनकी भाषा सरल, बोलचाल वाली और उर्दू मिश्रित है, तथा मुहावरों का प्रयोग उनकी पहचान है।
Q9. प्रेमचंद ने कौन सी पत्रिकाएँ निकालीं?
उन्होंने 1930 में बनारस से मासिक पत्रिका "हंस" शुरू की और "जागरण" नाम से एक साप्ताहिक भी निकाला। इससे पहले उन्होंने कुछ महीने "मर्यादा" और लगभग छह वर्षों तक "माधुरी" पत्रिका का संपादन किया था।
Q10. प्रेमचंद की कहानियाँ मुफ़्त कहाँ पढ़ी जा सकती हैं?
उनकी रचनाएँ सार्वजनिक डोमेन में हैं, इसलिए हिंदी विकिस्रोत, गद्य कोश, हिंदवी और रेख़्ता जैसी साइटों पर मुफ़्त उपलब्ध हैं। छपी हुई किताब चाहिए तो मानसरोवर के आठों भाग सबसे अच्छा विकल्प हैं।
Q11. क्या प्रेमचंद की रचनाएँ कॉपीराइट में हैं?
नहीं, उनकी सभी रचनाएँ सार्वजनिक डोमेन में हैं। भारतीय कॉपीराइट क़ानून के अनुसार लेखक की मृत्यु के साठ वर्ष बाद रचनाएँ मुक्त हो जाती हैं, और उनका निधन 1936 में हुआ था। हालाँकि किसी आधुनिक विद्वान की भूमिका या टीका पर अलग कॉपीराइट लागू हो सकता है।
Q12. क्या मैं भी अपनी कहानी ऑनलाइन प्रकाशित कर सकता हूँ?
हाँ, ख़ुद की कलम के प्लेटफ़ॉर्म पर कोई भी लेखक मुफ़्त में अपनी कहानी, कविता या शायरी प्रकाशित कर सकता है। अगर आप अपनी रचनाओं की किताब छपवाना चाहते हैं तो प्रकाशन सेवा ₹9,999 से शुरू होती है।
निष्कर्ष
प्रेमचंद को पढ़ते समय एक बात याद रखिए - वे किसी पात्र का पक्ष नहीं लेते। घीसू-माधव पर ग़ुस्सा आएगा, पर वे उन्हें बुरा नहीं कहते। जुम्मन ग़लत करता है, फिर भी वह खलनायक नहीं है। यही तटस्थता उन्हें उपदेशक नहीं, कहानीकार बनाती है।
ऊपर दिया गया पढ़ने का क्रम मानिए - ईदगाह से शुरू कीजिए और कफ़न सबसे अंत में पढ़िए। पहली पाँच कहानियों में डेढ़ घंटा लगेगा, और उसके बाद आप ख़ुद बाक़ी ढूँढने लगेंगे।
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प्रेमचंद की पहली किताब अंग्रेज़ों ने ज़ब्त करके जला दी थी। उन्होंने नाम बदला और फिर से लिखना शुरू कर दिया। आज उनकी किताब हर स्कूल में पढ़ाई जाती है।
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